परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज गोलबंद, अगस्त में रांची में होगी ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’

Ranchi: झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर आदिवासी समाज ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। मंगलवार को रांची में विभिन्न आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की एक रणनीतिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें परिसीमन के संभावित प्रभावों, विशेषकर अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे पर पूरे राज्य में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। साथ ही अगस्त 2026 में रांची में ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ आयोजित करने का फैसला लिया गया। आयोजकों का दावा है कि इस रैली में झारखंड के सभी 24 जिलों से लाखों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे।

आंदोलन को लेकर बनी रणनीति

बैठक में आंदोलन और रैली को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया। प्रचार-प्रसार और मीडिया समन्वय के लिए राज्यस्तरीय पांच प्रवक्ताओं की नियुक्ति करने, सोशल मीडिया और डिजिटल संचार के लिए आईटी सेल तथा आंदोलन के संचालन और समन्वय के लिए वार रूम गठित करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा राज्य के सभी 24 जिलों में जिला समन्वयक और जिला प्रवक्ताओं की नियुक्ति की जाएगी, जो अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को परिसीमन के संभावित प्रभावों की जानकारी देंगे।

गांव-गांव तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान

बैठक में यह भी तय किया गया कि पूरे राज्य में जागरूकता रथ निकाले जाएंगे। ये रथ गांवों और पंचायत स्तर तक पहुंचकर आदिवासी समाज को संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और परिसीमन के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे।

राष्ट्रपति समेत कई नेताओं से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

बैठक में निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय कानून मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल झारखंड के आदिवासी समाज की चिंताओं और मांगों से उन्हें अवगत कराते हुए पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की विशेष स्थिति तथा अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक हस्तक्षेप की मांग करेगा।

लोकतांत्रिक तरीके से चलेगा आंदोलन

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान झारखंड के आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और ऐतिहासिक हितों की किसी भी प्रकार की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर संचालित किया जाएगा तथा समाज के सभी वर्गों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में ये रहे मौजूद

बैठक में बंधु तिर्की, रमा खलखो, शशि पन्ना, अजय तिर्की, ग्लैडसन डुंगडुंग, अनिल अमिताभ पन्ना, बिनसाय मुंडा, राजेश लिंडा, सुषमा बिरुली, लक्ष्मी नारायण मुंडा, वाल्टर कांडुलना, शिवा कच्छप, अनिल उरांव, गोविंद टोप्पो सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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