Pakistan में ईरान युद्ध का असर, पेट्रोल-डीजल के दाम में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है. इस संकट का सीधा प्रभाव पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ा है. हालात को देखते हुए Pakistan की सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का फैसला लिया है. प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च की आधी रात से लागू कर दी गई हैं. कीमतों में अचानक हुई इस वृद्धि के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, क्योंकि लोग दाम बढ़ने से पहले तेल भरवाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर से रुकी सप्लाई

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने युद्ध के बीच Strait of Hormuz पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है. यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है. इसी वजह से कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है. पाकिस्तान में कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई, जिसमें उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar, वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb और पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik मौजूद रहे.

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की नई कीमत

नई कीमतें लागू होने के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 321.17 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि हाई-स्पीड डीजल की कीमत 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है. कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की खबर फैलते ही देश के बड़े शहरों—लाहौर, कराची, इस्लामाबाद और रावलपिंडी—में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कई जगहों पर सैकड़ों मीटर लंबी कतारें लग गईं और लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो पाकिस्तान समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.

रूस ने बढ़ाया मदद का हाथ

ऊर्जा संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को राहत देने के लिए रूस ने भी मदद का संकेत दिया है. ऊर्जा विशेषज्ञ Mamdouh G Salameh के अनुसार, लगभग 7,33,000 बैरल रूसी कच्चे तेल की एक खेप पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद है. पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी अरब और यूएई से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है, लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है. इसी वजह से पाकिस्तान अब अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है और रूसी तेल को भी अपने सप्लाई नेटवर्क में शामिल कर रहा है. पाकिस्तान बिजनेस काउंसिल के अनुसार, वैश्विक तेल कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से देश का चालू खाता घाटा लगभग 1.5 से 2 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है.

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