JMM vs BJP : नगर निगम नतीजों ने बदला सियासी मूड, चुनाव ने दिए नए सियासी संकेत
Ranchi: नगर निगम मेयर चुनाव के नतीजों ने झारखंड की शहरी राजनीति की तस्वीर बदल दी है. देर रात तक आए परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन ने शहरों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रणनीति इस बार भाजपा पर भारी पड़ी और वोटों के बिखराव के साथ बागियों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया.
भाजपा को तीन सीटें, गठबंधन के खाते में चार
भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने रांची से रोशनी खलखो, आदित्यपुर से संजय सरदार और मेदिनीनगर से अरुणा शंकर की जीत दर्ज कराई. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खाते में चार सीटें गईं, जिससे शहरी सत्ता में गठबंधन की एंट्री और मजबूत हुई.
2018 के मुकाबले बदली सियासी तस्वीर
वर्ष 2018 के नगर निकाय चुनावों में मेयर की पांच सीटें थीं—रांची, मेदिनीनगर, हजारीबाग, गिरिडीह और आदित्यपुर—और तब सभी पर भाजपा का कब्जा था. इस बार मेयर की सीटें बढ़कर नौ हो गईं, लेकिन परिणामों में भाजपा की पकड़ ढीली दिखी.
झामुमो-कांग्रेस की बड़ी जीतें
- गिरिडीह से झामुमो समर्थित प्रमिला देवी विजयी रहीं.
- देवघर से रवि राउत ने जीत दर्ज की.
- मानगो नगर निगम पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया. यहां पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता ने 18,601 मतों से भाजपा समर्थित संध्या सिंह को हराया.
निर्दलीयों की मौजूदगी, मुकाबले रोचक
- हजारीबाग से निर्दलीय अरविंद राणा ने जीत हासिल की.
- चास में निर्दलीय भोलू पासवान आगे चल रहे हैं; कांग्रेस के जमील अख्तर दूसरे स्थान पर हैं.
- मेदिनीनगर में भाजपा समर्थित अरुणा शंकर और कांग्रेस समर्थित नम्रता त्रिपाठी के बीच कांटे की टक्कर के बाद अरुणा शंकर विजयी घोषित हुईं.
- धनबाद की हॉट सीट पर भाजपा के बागी संजीव सिंह बढ़त बनाए रहे, जबकि झामुमो समर्थित चंद्रशेखर अग्रवाल पीछे रहे.
भाजपा को बागियों से सबसे ज्यादा नुकसान
मेयर चुनाव में भाजपा की मुश्किलें प्रत्याशी चयन के साथ ही शुरू हो गई थीं. पार्टी के भीतर असंतोष और बागी उम्मीदवारों ने परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाई.
- धनबाद में प्रत्याशी समर्थन को लेकर भीतरघात हुआ, जिससे बागियों को फायदा मिला.
- मानगो में संध्या सिंह के समर्थन पर पार्टी के अंदर विरोध उभरा.
- गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य सोनू ने सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बनाया, लेकिन भाजपा समर्थित शैलेंद्र चौधरी टिक नहीं सके.
- हजारीबाग में सांसद मनीष जायसवाल का समर्थन निर्दलीय अरविंद राणा को मिलना भाजपा के लिए नुकसानदेह रहा.
